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किसान आंदोलन: किसानों ने गृहमंत्री के प्रस्ताव को ठुकराया

सिंधु बॉर्डर पर किसानों ने प्रदर्शन तेज करने का आह्वान किया है. किसानों ने कहा है कि 1 दिसंबर से राज्यों में भी प्रदर्शन शुरू होगा. अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने कहा है कि पंजाब और हरियाणा के किसान भारी संख्या में गोलबंद होकर पहुंच रहे हैं. यूपी और उत्तराखंड के किसान भी दिल्ली आ रहे हैं. किसान संगठनों ने अपील की है कि किसानों के सभी पक्षधर, कारपोरेट विरोधी ताकतें हमारा समर्थन करें. किसान संगठनों का कहना है कि अखिल भारतीय गोलबंदी तेज की जाएगी और 1 दिसम्बर से राज्यों में विरोध आयोजित होगा.

किसान संगठनों ने कहा है कि अगर सरकार किसानों की मांगों को सम्बोधित करने पर गम्भीर है तो उसे शर्तें लगाना बंद कर देना चाहिए. यह मान कर नहीं चलना चाहिए कि वार्ता का अर्थ है कि ‘‘किसानों को इन कानूनों के लाभ समझाए जाएं”. सरकार को सीधे तौर पर बताना चाहिए कि उसके पास क्या समाधान है. किसान अपनी मांगों पर बहुत स्पष्ट हैं.

सिंधु बॉर्डर पर चल रही किसानों की बैठक खत्म हो गई है. किसान संगठनों ने गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. यानी कि किसान अब दिल्ली- हरियाणा के सिंधु बॉर्डर से बुराडी के निराकारी समागम मैदान नहीं जाएंगे. किसानों ने कहा है कि उनका प्रदर्शन सिंधु बॉर्डर पर ही जारी रहेगा. अमित शाह ने शनिवार को किसानों से अपील की थी कि किसान सिंधु बॉर्डर से हट जाएं और बुराड़ी के निरंकारी समागम मैदान में चले जाएं. अमित शाह ने कहा था कि सरकार किसानों से वहां बात करने को तैयार है. लेकिन किसानों ने इस अपील को ठुकरा दिया है.

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खुफिया एजेंसी आईबी के दो बड़े अधिकारी सिंधु बॉर्डर पहुचे हैं. सूत्रों के मुताबिक डिप्टी डायरेक्टर लेवल के दो अधिकारी सिंधु बॉर्डर पहुंचे  है और हालात का जायजा ले रहे हैं. ये आई अधिकारी दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के साथ भी बातचीत कर रहे हैं.

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन पर दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने कहा है कि केंद्र सरकार को किसानों के साथ बिना शर्त बात करे. बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि अगर किसान बुराड़ी में प्रदर्शन करते हैं तो उनके साथ सरकार तुरंत बात करने को तैयार है.

इस पर सतेंद्र जैन ने कहा कि इसमें कोई कंडीशन थोड़ी लगनी चाहिए कि कब बात करेगी सरकार. बात तुरन्त करनी चाहिए. कंडीशन वाली बात थोड़ी है. देश के किसान, हमारे अन्नदाता हैं. उनसे तुरन्त बात करनी चाहिए और जहां वो चाहें उन्हें बैठने देना चाहिए.

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दिल्ली में किसानों के परेशानी पर सतेंद्र जैन ने कहा कि हमें किसानों की परेशानी भी देखनी चाहिए. वो अपने घर से कई सौ किलोमीटर दूर से आये हैं, उनकी परेशानी को देखिए, उनको कितनी परेशानी है. कोई खुशी से नहीं आया है. लोकतंत्र है तो उनको शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज रखने का पूरा अधिकार है और वो जहां चाहें अपने अधिकार का प्रयोग कर सकते हैं.

सिंधु बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन की वजह से सीमा पार आने-जाने वालों को काफी परेशानी हो रही है. दूसरे राज्यों से दिल्ली आने वाले लोग बॉर्डर बंद होने से काफी परेशान हैं. उन्हें काफी दूर तक पैदल आना पड़ रहा है. बॉर्डर पार करने वाले यात्रियों का कहना है कि उन्हें ब्लॉकेड की वजह से कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है.

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