उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में इस बार किसकी सरकार बनने जा रही है इस बात का पता तो 10 मार्च को चलेगा, लेकिन लोगों के मन में क्या है इसका बारे में एग्जिट पोल में पता चलेगा । दरअसल ये असल नतीजे तो नहीं होते लेकिन लोगों के वोट डालने के रुझान के जरिए ये अंदाज लगाया जाता है कि नतीजे किधर की ओर जा सकते हैं. इसके जरिए अनुमान लगाया जाता है कि कौन सा सियासी दल कहां जीत रहा है और कौन कहां पीछे होगा। हालांकि इनके खरे उतरने को लेकर हमेशा शक रहा है। वहीं इस दौरान जो एक बात दिमाग में आती है कि यह एग्जिट पोल की शुरुआत कैसे हुई और किसने की। तो चलिए आपको बताते हैं कि सबसे पहला एग्जिट पोल 1967 में आया था।
इन्होंने की थी एग्जिट पोल की शुरुआत
एग्जिट पोल को शुरू करने का श्रेय नीदरलैंड के एक समाजशास्त्री और पूर्व राजनेता मार्सेल वॉन डैम को जाता है। उन्होंने 15 फरवरी, 1967 में पहली बार इसका इस्तेमाल किया था। नीदरलैंड में हुए चुनाव में उनका आकलन सटीक बैठा था। वहीं भारत में इसकी शुरुआत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक ओपिनियन के मुखिया एरिक डी कोस्टा ने की थी। भारत में चुनाव के दौरान जनता के मिजाज को परखने वाले वे पहले इंसान थे।
ऐसे बनता है एग्जिट पोल
चुनाव के दौरान निर्वाचकों, वोटर से बातचीत और कैंडिडेट्स की जीत-हार के पूर्वानुमानों के आकलन की एक पूरी प्रक्रिया होती है इसे सर्वे कहते हैं। यह सर्वे अलग-अलग आधार पर किए जाते हैं और इन्ही सर्वें के बीच में से निकलता है एग्जिट पोल। जिस दिन से मतदान शुरू होते हैं तब से लेकर अंतिम दिन तक पूरा डाटा इकट्ठा किया जाता है। वोटर्स से पूछा जाता है कि उसने किसको वोट दिया, फिर इसके बाद टीवी चैनल आखिरी दिन एग्जिट पोल दिखाते हैं।
