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भारत बंद के साथ नया सस्पेंस, गृहमंत्री अमित शाह ने बुलाई किसानों की बैठक

अभी तो आंदोलन का वक्त भी नहीं थमा कि किसान आंदोलन में एक नया सस्पेंस आ गया भारत बंद के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने शाम 7:00 बजे किसे किसान नेताओं की बैठक बुलाई है यह एक औपचारिक मुलाकात होगी सुबह अमित शाह की तरफ से किसानों को प्रस्ताव भेजा गया था इसके तहत कुल 13 सदस्य गृहमंत्री से मिलेंगेKisan Andolan LIVE & Latest News: Amit Shah Meeting Today At JP Nadda's  House - किसान आंदोलन : गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का हंगामा, नड्डा के घर  केंद्रीय मंत्रियों की बैठक, शाह ...

किसान नेता राकेश टिकैत के मुताबिक अभी सभी किसान दिल्ली के सिंधु बॉर्डर जा रहे हैं उसके बाद शाम को 7 बजे गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे! यह काफी अहम जानकारी है क्योंकि उन्होंने अचानक से यह बैठक बुलाई है, वो भी तब जब सरकार पहले ही 9 दिसंबर यानी बुधवार को किसान संगठनों से फिर मुलाकात करने वाली है. मंगलवार की सुबह में अमित शाह की तरफ से भेजा गया प्रस्ताव भारत बंद के बीच आया, जब किसानों ने बंद के आह्वान के बीच ट्रैफिक, दुकानें, कई सेवाओं वगैरह को ठप कर दिया.!किसानों का 'क्रोध' शांत करने में कामयाब होगी सरकार? 3 बजे की मीटिंग पर सबकी  नजर | Zee Business Hindi

जानकारी है कि किसान नेता आज शाम 7 बजे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलेंगे. माना जा रहा है कि यह अनौपचारिक मुलाक़ात होगी. सुबह अमित शाह की तरफ़ किसानों को प्रस्ताव भेजा गया था. इसके तहत कुल 13 सदस्य गृहमंत्री से मिलेंगे.

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अमित शाह ने सिंघू, टिकरी और ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर बैठे किसान नेताओं को बैठक में बुलाया है. राकेश टिकैत को भी बैठक में बुलाया गया है. राकेश टिकैत ने बताया कि ‘मेरे पास फ़ोन आया था, गृहमंत्री अमित शाह ने बैठक के लिए बुलाया है. हम जाएंगे बैठक में और नेता जाएंगे. उन्होंने 7 बजे बुलाया है.’Farmers protest: किसान नेताओं के साथ सरकार की बैठक, कई मुद्दों पर चर्चा |  Zee Business Hindi

बता दें कि इसके पहले हुई कई राउंड की बातचीत असफल रही है. शनिवार को हुई आखिरी मीटिंग सात घंटों तक चली थी, लेकिन फिर भी कोई हल नहीं निकला था. सरकार ने 9 दिसंबर को फिर से मीटिंग बुलाई है. हालांकि, किसानों ने साफ कर दिया है कि सितंबर में लाए गए इस कानून को वापस लिए जाने से कम उन्हें कुछ भी मंजूर नहीं है. उनको डर है कि इस कानून से उनकी आय कम हो जाएगी, वहीं वो कॉरपोरेट कंपनियों के मोहताज हो जाएंगे.

किसानों के साथ बातचीत को आगे बढ़ा रहे कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने वार्ता के असफल रहने के बाद कहा था कि सरकार में ‘अहंकार का भाव नहीं है’ लेकिन उन्होंने यह भी साफ कर दिया था कि वो इन कानूनों को वापिस नहीं लेंगे. किसानों ने इन कानूनों में खामियों को लेकर सरकार को 39 बिंदुओं का प्रेजेंटेशन दिया था.

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