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फेल हो गई मोदी सरकार? जानिए सर्वे में क्या बोले लोग

  फेल हो गई मोदी सरकार? जानिए सर्वे में क्या बोले लोग

 

सर्वे में शामिल लोगों से आजतक ने सवाल पूछा कि नरेंद्र मोदी सरकार की सबसे बड़ी विफलता क्या है? इसके जवाब में सबसे ज्यादा 25 फीसदी लोगों ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी का नरेंद्र मोदी सरकार ने जिस तरह से सामना किया है वो सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है.

 

  • कोरोना संक्रमण से निपटने में फेल रही मोदी सरकार?
  • 25 फीसदी लोगों ने बताया मोदी सरकार की सबसे बड़ी नाकामी
  • बेरोजगारी मोदी सरकार की दूसरी बड़ी असफलता

कोरोना वायरस संक्रमण, इकोनॉमी की चिंताजनक हालत, बढ़ती बेरोजगारी, लॉकडाउन के दौरान मजदूरों के पलायन की भयावह तस्वीरें, क्या है मोदी सरकार की सबसे बड़ी नाकामी. इस मुद्दे पर आजतक के मूड ऑफ द नेशन में लोगों ने खुलकर अपनी राय जाहिर की.

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कोविड-19 का सामना मोदी सरकार की सबसे बड़ी नाकामी

सर्वे में शामिल लोगों से आजतक ने सवाल पूछा कि नरेंद्र मोदी सरकार की सबसे बड़ी विफलता क्या है? इसके जवाब में सबसे ज्यादा 25 फीसदी लोगों ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी का नरेंद्र मोदी सरकार ने जिस तरह से सामना किया है वो सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है.

बेरोजगारी मोदी सरकार की दूसरी सबसे बड़ी नाकामयाबी

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23 फीसदी लोग बेरोजगारी को मोदी सरकार की सबसे बड़ी असफलता मानते हैं. जबकि लॉकडाउन के दौरान मजदूरों के पलायन को 14 फीसदी लोग मोदी सरकार की सबसे बड़ी नाकामी करार देते हैं.

महंगाई को 11 फीसदी लोग मानते हैं मोदी सरकार की विफलता

11 फीसदी लोग महंगाई को मोदी सरकार की सबसे बड़ी कमजोरी या नाकामी मानते हैं. 7 फीसदी लोग अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार का जो रवैया है उसे सरकार की सबसे बड़ी असफलता मानते हैं.

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एंटी CAA प्रदर्शन को 1 फीसदी लोग मानते सरकार की नाकामी

स्वास्थ्य सुविधाओं की मुकम्मल व्यवस्था न होना 6 फीसदी लोग मोदी सरकार की सबसे बड़ी विफलता मानते हैं. किसानों की समस्या को 6 फीसदी लोग देश की सबसे बड़ी समस्या मानते हैं. जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता, CAA के खिलाफ प्रदर्शन, सांप्रदायिक हिंसा और अल्पसंख्यकों में डर, चीन नेपाल और पाकिस्तान से बिगड़ते रिश्तों को मात्र 1-1 फीसदी लोग नरेंद्र मोदी सरकार की सबसे बड़ी नाकामी मानते हैं.

आजतक के लिए ये सर्वे कर्वी इनसाइट्स लिमिटेड ने किया जिसमें 12 हजार 21 लोगों से बात की गई. इनमें से 67 फीसदी ग्रामीण जबकि शेष 33 फीसदी लोग शहरी थी. 19 राज्यों की कुल 97 लोकसभा और 194 विधानसभा सीटों के लोग सर्वे में शामिल किए गए.

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जिन 19 राज्यों में ये सर्वे किया गया उनमें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं. ये सर्वे 15 जुलाई से 27 जुलाई के बीच किया गया.

सर्वे में 52 फीसदी पुरुष, 48 फीसदी महिलाएं शामिल थीं. अगर धर्म के नजरिए से देखा जाए तो 86 फीसदी हिंदू, 9 फीसदी मुस्लिम व पांच फीसदी अन्य धर्मों के लोगों से उनकी राय जानी गई. जिन लोगों पर सर्वे किया गया उनमें 30 फीसदी सवर्ण, 25 फीसदी एससी-एसटी व 44 फीसदी अन्य पिछड़े वर्ग के लोग शामिल थे. सर्वे में शामिल 57 फीसदी लोग 10 हजार रुपये महीने से कम की आमदनी वाले थे जबकि 28 फीसदी 10 से 20 हजार रुपये और 15 फीसदी 20 हजार रुपये महीने से ज्यादा कमाने वाले लोग थे. सर्वे के सैंपल में किसान, नौकरीपेशा, बेरोजगार, व्यापारी, छात्र आदि को शामिल किया गया था.

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