दिल को छू जाने वाली तस्वीर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से आई जहां एक दुल्हन की अनोखी विदाई दिखी ,यहां दुल्हन की विदाई पुराने समय की तरह बैलगाड़ी पर की गई. बैलगाड़ी का सारथी बना दुल्हन का भाई करीब डेढ़ किमी तक अपनी बहन को विदा करने गया. पुरानी परंपरा को फिर से देख लोगों की भीड़ जमा रही. मामला बिलासपुर जिले में आने वाले मोपका गांव का बताया जा रहा है. यहां रहने वाली एक लड़की वर्षा की शादी मदनपुर गांव के लड़के प्रदीप से तय हुई थी.
22 अप्रैल को मोपका से बारात आई थी. सुबह शादी होने के बाद दुल्हन के भाई ने अपनी इच्छा जताई. दुल्हन के भाई ने बताया कि वे दोनों किसान परिवार हैं. इसलिए उसकी इच्छा है कि वह अपनी बहन की विदाई बैलगाड़ी से करे. इसके बाद घरवालों ने भी इसका साथ दिया. इसके बाद दुल्हन के भाई ने अपनी बहन को गांव से करीब डेढ़ किमी तक बैलगाड़ी पर विदा किया. इस मौके पर यह पुरानी परंपरा देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ लगी रही.
22 अप्रैल को हुई थी शादी
जानकारी के मुताबिक बिलासपुर जिले के मोपका गांव में नर्मदा साहू की पुत्री वर्षा का विवाह मदनपुर ग्राम के प्रदीप से तय हुआ था. बीते 22 अप्रैल को सारी रीति रिवाज के तहत पूरी वैवाहिक रस्मों को पूरा किया गया. सुबह विदाई की तैयारी की गई. बेटी को विदाई देने के लिए रिश्तेदारों और परिवार के लोग इकट्ठे खड़े हुए थे. दुल्हन का भाई घर के बाहर बहन की विदाई के लिए बैलगाड़ी सजाए खड़ा था. वैसे तो पुराने समय में गांव में सम्पन्न लोग लड़की डोली में विदा करते थे. लेकिन वह सब गुजरे जमाने की बात हो गयी है. विदाई की सभी रस्में पूरा कर दुल्हन बैलगाड़ी में बैठ गई.![]()
गांव के मुहल्लों से गुजरती हुई दूल्हे-दुल्हन की यह जोड़ी सभी की चर्चा के बीच रही. सभी ने इस पुरानी परंपरा की तारीफ की. सुबह के वक़्त गांव गली मोहल्ले से गुजर रही बैलगाड़ी में बैठे दूल्हा दुल्हन को देख रहे थे. करीब डेढ़ किलोमीटर गांव का सफर तय करने के बाद मुख्य मार्ग पर पहुंचने के बाद दुल्हन ससुराल के लिए चल दी. बाद में भाई वापिस घर लौट आया. ग्रामीणों ने बताया कि लड़का और लड़की दोनों ही परिवार आर्थिक रूप से संपन्न हैं. भाई की इच्छा को ध्यान में रखते हुए यह अनोखी विदाई की गई.
