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संवैधानिक संकट का ड्रामा बता उत्तराखंड के CM तीरथ ने दिया था इस्तीफा ,अब नया नेता चुनने की तैयारी

उत्तराखंड में राजनितिक संकट ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है एक ही पार्टी के अब तक दो मुख्यमंत्री इस्तीफा दे चुके है अब नंबर तीसरे का है,  मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने शुक्रवार को राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से मुलाकात कर अपना इस्तीफा उन्हें सौंप दिया। अब शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक दल की बैठक में वर्तमान विधायकों में से ही किसी को विधायक दल का नेता चुना जाएगा।

तीरथ सिंह रावत ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा - BBC News  हिंदी
दिल्ली से लेकर देहरादून तक दिन भर चली मुलाकातों और बैठकों के दौर के बाद रावत ने रात करीब साढ़े ग्यारह बजे अपने मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सहयोगियों के साथ राज्यपाल से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा। इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री रावत ने संवाददाताओं को बताया कि उनके इस्तीफा देने का मुख्य कारण संवैधानिक संकट था, जिसमें निर्वाचन आयोग के लिए चुनाव कराना मुश्किल था ।

उन्होंने कहा कि संवैधानिक संकट की परिस्थितियों को देखते हुए मैंने अपना इस्तीफा देना उचित समझा। रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अपने केंद्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने उन्हें उच्च पदों पर सेवा करने का मौका दिया।फटी जींस से लेकर पीएम मोदी को भगवान बताने तक... तीरथ सिंह रावत के इन बयानों  पर खूब मचा बवाल > Latest Headline

पौड़ी से लोकसभा सदस्य रावत ने इस वर्ष 10 मार्च को मुख्यमंत्री का पद संभाला था और संवैधानिक बाध्यता के तहत उन्हें छह माह के भीतर यानी 10 सितंबर से पहले विधानसभा का सदस्य निर्वाचित होना था।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 151ए के मुताबिक निर्वाचन आयोग संसद के दोनों सदनों और राज्यों के विधायी सदनों में खाली सीटों को रिक्ति होने की तिथि से छह माह के भीतर उपचुनावों के द्वारा भरने के लिए अधिकृत है, बशर्ते किसी रिक्ति से जुड़े किसी सदस्य का शेष कार्यकाल एक वर्ष अथवा उससे अधिक हो।उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के महीनों बाद तीरथ सिंह रावत ने  दिया इस्तीफा – Khabar Frontline

यही कानूनी बाध्यता मुख्यमंत्री के विधानसभा पहुंचने में सबसे बड़ी अड़चन के रूप में सामने आई। क्योंकि विधानसभा चुनाव में एक साल से कम का समय बचा है। वैसे भी कोविड महामारी के कारण भी फिलहाल चुनाव की परिस्थितियां नहीं बन पाईं।

यह पूछे जाने पर कि संवैधानिक संकट से बचने के लिए प्रदेश में अप्रैल में हुआ सल्ट उपचुनाव उन्होंने क्यों नही लड़ा, मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय वह कोविड से पीड़ित थे और इसलिए उन्हें इसके लिए समय नहीं मिला।उत्तराखंड: तीरथ सिंह रावत ने दिया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा, संवैधानिक  अड़चन को बताया कारण | न्यूजबाइट्स

मुख्यमंत्री रावत के साथ मौजूद प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने कहा कि उपचुनाव नहीं करा पाएंगे। इसलिए हम लोगों ने उचित समझा कि संवैधानिक संकट की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि नए नेता का चयन करने के लिए शनिवार को पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।

आज दोपहर तीन बजे बुलाई गई इस बैठक की अध्यक्षता स्वयं प्रदेश अध्यक्ष कौशिक करेंगे जबकि केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा महासचिव व उत्तराखंड के प्रभारी दुष्यंत गौतम मौजूद रहेंगे। उन्होंने बताया कि पार्टी की ओर से सभी विधायकों को शनिवार की बैठक में उपस्थित रहने की सूचना दे दी गई है।Uttarakhand New CM: तीरथ सिंह रावत ने राज्यपाल से मिलकर पेश किया सरकार  बनाने का दावा, शाम 4 बजे शपथ ग्रहण | Tirath singh rawat new cm of  uttarakhand will take oath

उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें उसी दिन लगने लगी थीं जब रावत को केंद्रीय नेतृत्व ने दिल्ली तलब किया था और सभी निर्धारित कार्यक्रमों को छोड़कर वह बुधवार को दिल्ली पहुंचे।

अपने तीन दिन के दिल्ली दौरे पर उन्होंने बृहस्पतिवार रात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा से मंत्रणा की थी। शुक्रवार को उन्होंने चौबीस घंटे के भीतर दूसरी बार नड्डा से मुलाकात की।तीरथ सिंह रावत ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया, शनिवार को  मिलेंगे भाजपा विधायक | भारत समाचार - News Fatafat

देहरादून लौटने के बाद मुख्यमंत्री रावत राज्य सचिवालय पहुंचे और वहां संवाददाताओं से मुखातिब हुए लेकिन उन्होंने अपने इस्तीफे के संबंध में कोई बात न करते हुए नई घोषणाएं कर सबको हैरानी में डाल दिया। ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि वह इस संवाददाता सम्मेलन में अपने इस्तीफे की घोषणा कर सकते हैं।तीरथ सिंह रावत ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा - BBC News  हिंदी

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुए परिवहन और पर्यटन आदि क्षेत्रों के लोगों को राहत देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं और उन्हें लगभग 2000 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी।

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने कोविड-19 महामारी से प्रभावित युवाओं को रोजगार देने के लिए छह माह में 20,000 रिक्तियां भरने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वह यह घोषणा पहले ही करना चाहते थे लेकिन तीन दिन दिल्ली में रहने के कारण अब कर रहे हैं।रेस में न होने के बावजूद सबसे आगे निकल गए तीरथ सिंह रावत, आखिर बीजेपी ने  इन्हें ही क्यों बनाया मुख्यमंत्री | Why did bjp make tirath singh rawat the  chief minister

प्रदेश में फिलहाल विधानसभा की दो सीटें, गंगोत्री और हल्द्वानी रिक्त हैं। भाजपा विधायक गोपाल सिंह रावत का इस वर्ष अप्रैल में निधन होने से गंगोत्री जबकि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता इंदिरा हृदयेश के निधन से हल्द्वानी सीट खाली हुई है।

इस नाम पर भी हो रही चर्चा
उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री की दौड़ में एक और नाम बिशन सिंह चुफाल का जुड़ गया है। भाजपा विधायक दल में चुफाल ऐसे विधायक हैं, जो वरिष्ठता क्रम में देहरादून कैंट के विधायक हरबंस सिंह भल्ला के बाद दूसरे नंबर पर हैं। पिथौरागढ़ के डीडीहाट से विधायक चुफाल उत्तराखंड के गठन के बाद से कभी चुनाव नहीं हारे। वह अभी मंत्री हैं और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के प्रमुख विरोधी माने जाते हैं। कहा जाता है कि इसी वजह से त्रिवेंद्र ने उन्हें कभी मंत्री नहीं बनाया। त्रिवेंद्र के इस्तीफे के बाद भी चुफाल के नाम की चर्चा हुई थी, लेकिन एन वक्त पर तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बना दिया गया। चुफाल कुमाऊं से हैं।

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