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जबरदस्ती के हनुमान बने चिराग ने पुरे एनडीए के किले मे ही लगा दी आग , अब उनके राम कैसे बचें?

एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान ने खुद को एनडीए से अलग तो बताया पर भाजपा के जबरदस्ती के हनुमान बन एनडीए के पुरे किले को ही जला दीं, चिराग को लगा की ये लंका सिर्फ नितीश कुमार की ही जलेगी लेकीन जो आग पुरे एनडीए मे लगी थी वो भाजपा को क्यो छोडती, नितीश की तो जली पर भाजपा भी साथ जल गयी, पुरे चुनाव मे प्रचार तक , या बडे होर्डिंग तक कही भी किसी ने नही देखा की ये चुनाव नितीश कुमार का है, नितीश के कब्जे से भाजपा पहले ही इस चुनाव पर कब्जा कर चुकी थी, नितीश को छोड़ कोई प्रचार करने वाला जदयू की तरफ से नही था और नितीश के प्रचार मे हर जगह विरोध भी भारी था! ऐसे मे भाजपा के शिर्ष नेताओ ने पुरे प्रचार की कमान अपने हाथो मे ले लीं, जैसे उन्हे पता हो की राम के हनुमान ने जबरदस्ती ही किले मे आग लगायी है! और इस बात का अंदेशा भी था , खैर बाते जो भी हो पर किले पर कब्जे का सपना अब एनडीए के लिए अधूरा हो गया क्योंकि एनडीए की किला तो चिराग से जलाया पर कब्जा तेजस्वी का हो गया !

इंडिया-टुडे-एक्सिस माय इंडिया एग्जिट पोल के मुताबिक बिहार की कुल 243 सीटों में से 139-161 सीटें तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन को मिलती दिख रही हैं. एनडीए को बिहार में महज 69 से 91 सीटों पर ही संतोष करना पड़ सकता है. इसके अलावा बिहार में अकेले चुनाव लड़ने वाली एलजेपी को 3 से 5 सीटों पर जीत मिलने का अनुमान है, लेकिन वोट फीसदी 7 फीसदी मिलता दिख रहा है. वहीं, दूसरी ओर महागठबंधन को 44 फीसदी और एनडीए को 39 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है. !

मनमुताबिक सीटें न मिलने से बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने एनडीए से अलग राह अपनाई. एलजेपी ने बिहार की 135 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे. इनमें से ज्यादातर प्रत्याशी जेडीयू के खिलाफ चुनावी ताल ठोकते नजर आए. हालांकि, गोविदंगज, लालगंज, भागलपुर, राघोपुर, रोसड़ा और नरकटियागंज सीट जैसी सीट पर एलजेपी प्रत्याशी बीजेपी के खिलाफ भी चुनाव लड़ रहे थे.

एग्जिट पोल के मुताबिक बिहार में भले ही एलजेपी को 3 से 5 सीटें मिलती दिख रही हों, लेकिन चिराग ने दो दर्जन से ज्यादा सीटों पर बीजेपी के बागी नेताओं को कैंडिडेट बनाकर नीतीश कुमार के राजनीतिक समीकरण को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है. एलजेपी के अलग जाने से जेडीयू को सीटों पर नुकसान हुआ. पासवान उपजाति वोट एनडीए 31% और एलजेपी 30% में बंट गए. एलजेपी ने महादलितों और आर्थिक रूप से पिछड़े वोटों में भी सेंध लगाई. इन दोनों वर्गों से एलजेपी को आठ-आठ फीसदी वोट मिले. जिससे नीतीश कुमार को काफी नुकसान हुआ.

एक्सिस माय इंडिया के सीएमडी प्रदीप गुप्ता ने कहा कि बिहार चुनाव में 30 से 40 सीटों पर एलजेपी ने जेडीयू को नुकसान पहुंचाया है. साथ ही उनका कहना है कि अगर जेडीयू-एलजेपी साथ लड़ती तो बीजेपी से ज्यादा सीटें जेडीयू की होतीं. एग्जिट पोल में मिले एलजेपी के वोट शेयर को अगर एनडीए के वो साथ जोड़कर देखें तो 46 फीसदी होता है, जो कि महागठबंधन के वोट शेयर से 2 फीसदी ज्यादा होता है. विधानसभा चुनाव में दो फीसदी वोट सत्ता बनाने और बिगाड़े की ताकत रखता है.

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