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बिहार में जाति आधारित जनगणना के नतीजे आने के बाद ‘जितनी आबादी, उतना हक’ वाली टिप्पणी पर चल रही बहस के बीच कांग्रेस में दो फाड़

नई दिल्ली: बिहार में जाति आधारित जनगणना के नतीजे आने के बाद ‘जितनी आबादी, उतना हक’ वाली टिप्पणी पर चल रही बहस के बीच कांग्रेस में दो फाड़ हो गया है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने मंगलवार को कहा कि ‘जितनी आबादी उतना हक’ के नारे का समर्थन करने वाले लोगों को पहले इसके नतीजों को भी समझना होगा. अगर जितनी आबादी उतना हक पर काम होगा तो बहुसंख्यवाद का सामना करना पड़ सकता है. यहां बताना जरूरी है कि यह राहुल गांधी ही थे,. जिन्होंने इस नारे की वकालत की थी. हालांकि, बाद में अभिषेक मनु सिंघवी ने अपने पोस्ट को डिलीट कर लिया और कांग्रेस को इस पर सफाई देनी पड़ गई.

अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या कहा था
अभिषेक मनु सिंघवी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘अवसर की समानता कभी भी परिणामों की समानता के समान नहीं होती है. जितनी आबादी उतना हक का समर्थन करने वाले लोगों को पहले इसके परिणामों को पूरी तरह से समझना होगा. इसकी परिणति बहुसंख्यकवाद में होगी.’ बता दें कि सोमवार को बिहार की नीतीश सरकार ने जातीय जनगणना का डेटा जारी किया था, जिसके मुताबिक राज्य के 13.07 करोड़ लोगों में से 36% अत्यंत पिछड़ा वर्ग से हैं, 27.13% अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं.

सिंघवी ने पोस्ट को किया डिलीट
हालांकि, अभिषेक मनु सिंघवी ने बाद में अपने पोस्ट को डिलीट कर दिया. बताया जा रहा है कि पार्टी के दबाव में उन्होंने अपने पोस्ट को डिलीट किया है. कांग्रेस के सीनियर नेता जयराम रमेश ने एक्स पर कहा कि जाति जनगणना पर अभिषेक मनु सिंघवी की राय निजी है, यह पार्टी का स्टैंड नहीं है. इससे पहले राहुल गांधी ने बिहार के जाति-आधारित सर्वेक्षण की सराहना की थी और ‘जितनी आबादी, उतना हक’ की वकालत की

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बिहार के जातीय सर्वे पर राहुल गांधी ने क्या कहा था
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बिहार में जाति आधारित गणना के आंकड़े सामने आने के बाद सोमवार को कहा कि देश के जातिगत आंकड़े जानना जरूरी है और जिनकी जितनी आबादी है, उन्हें उनका उतना हक मिलना चाहिए. उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘बिहार की जातिगत जनगणना से पता चला है कि वहां ओबीसी, एससी और एसटी 84 प्रतिशत हैं. केंद्र सरकार के 90 सचिवों में से सिर्फ़ 3 ओबीसी हैं, जो भारत का मात्र 5 प्रतिशत बजट संभालते हैं!’ राहुल गांधी ने कहा, ‘इसलिए, भारत के जातिगत आंकड़े जानना ज़रूरी है. जितनी आबादी, उतना हक़ – ये हमारा प्रण है.’

बिहार सरकार ने सोमवार को जारी किया रिजल्ट
बिहार सरकार ने सोमवार को बहुप्रतीक्षित जाति आधारित गणना के निष्कर्ष जारी किए, जिसमें खुलासा हुआ कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) राज्य की कुल आबादी का 63 प्रतिशत हैं. बिहार के विकास आयुक्त विवेक सिंह द्वारा यहां जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य की कुल जनसंख्या 13.07 करोड़ से कुछ अधिक है, जिसमें से 36 प्रतिशत के साथ ईबीसी सबसे बड़ा सामाजिक वर्ग है। इसके बाद ओबीसी 27.13 प्रतिशत हैं.

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