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कमलनाथ और शिवराज की सेना मे गद्दार कहने पर जुबानी जंग तेज

report by mp election-ravishankar

  • गद्दारी” कमलनाथ सरकार के पतन का कारण बनी
  • सिंधिया का यह “विश्वासघात” अब कांग्रेस के लिए चुनावी जुमला है
  • मैं कमलनाथ नहीं हूं, जो विकास के लिए पैसा नहीं देंगे

 

 

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अगले हफ्ते होने वाले मध्यप्रदेश उपचुनाव मे रैलियो और भाषणों का दौर जारी है! वहां की रैलीयां की सम्मान की सारी सीमाऐं भी नेताओ ने लांघ दी है हर वाण अपशब्दों के कमान से निकल रहे हैं, मध्यप्रदेश की पुरी राजनीति मर्यादा को पार कर उन बयानो पर आ गयी है हर बात एक दुसरे पर लागु हो रही, कमलनाथ हो सिंधिया हो या शिवराज की सेना हर कोई अपशब्दो का प्रयोग खुल के कर रहा है गौरतलब है की पूर्व कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधियाके 22 विधायकों के साथ बीजेपी में जाने के बाद 28 सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं. सिंधिया का यह “विश्वासघात” अब कांग्रेस के लिए चुनावी जुमला है. यह चुनाव तय करेगा कि अगली सरकार किसकी बनेगी. यह मध्य प्रदेश कांग्रेस में कमलनाथ की राजनीतिक पकड़ भी तय करेगा. इसके अलावा यह चुनाव ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में राजनीतिक कद को भी तय करेगा. यह एक तरह से जनमत संग्रह होगा कि क्या शिवराज सिंह चौहान  ने कांग्रेस के बागियों से हाथ मिलाकर सही काम किया?

कांग्रेस के अनुसार “गद्दारी” कमलनाथ सरकार के पतन का कारण बनी, लेकिन बीजेपी का कहना है कि गद्दार वे नहीं बल्कि कांग्रेस है जिसने अपने घोषणा पत्र में किए गए वादों को पूरा नहीं करके मध्यप्रदेश की जनता को धोखा दिया है.

मध्यप्रदेश में कमलनाथ कांग्रेस के चुनाव अभियान का चेहरा हैं, जबकि दिग्विजय सिंह पृष्ठभूमि में हैं. दिग्विजय सिंह और सिंधिया के बीच का सत्ता को लेकर टकराव ही वह कारण था, जिसके चलते सिंधिया कांग्रेस छोड़कर चले गए. कमलनाथ को उम्मीद है कि मतदाताओं की सहानुभूति उनके पक्ष में काम करेगी.

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शिवराज ने बुधवार को हुई रैलियों में से एक में कहा, “मैं कमलनाथ नहीं हूं, जो विकास के लिए पैसा नहीं देंगे. मैं आपको अनूपपुर के विकास का आश्वासन देता हूं. कमलनाथ कहते थे कि मामा ने राज्य के खजाने को खाली कर दिया था. लेकिन मैं कहता हूं कि यह औरंगजेब का खजाना नहीं है जिसे खाली किया जा सकता है.”

लेकिन इस चुनाव में “गद्दारी” या ”विश्वासघात” शब्द का बार-बार जिक्र इस क्षेत्र के इतिहास का भी एक तथ्य है. जिन 28 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं उनमें से 16 सीटें इसी क्षेत्र की हैं जो कि सिंधिया का गढ़ कहलाता है.

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