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चिराग पासवान के बागी तेवर ,जेडीयू के खाते में आधी से ज्यादा सीटें

जेडीयू के खाते में आधी से ज्यादा सीटें, ‘लोजपा का टेंशन बीजेपी की जिम्मेदारी’NADDA-NITISH

हाइलाइट्स:

  • बिहार एनडीए में सीट शेयरिंग फॉर्मुला तय
  • बीजेपी-जेडीयू के बीच होगी सीट शेयरिंग
  • लोजपा के साथ सीटें साझा करने की जिम्मेदारी बीजेपी की
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा  के नेता जीतन राम मांझी के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन  में लौटने और चिराग पासवान के बागी तेवर के बाद सीट शेयरिंग पर फंसा पेच निकल गया है। इसका फॉर्मूला बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के बीच निकाला गया है। इस संदर्भ में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की नीतीश कुमार से हुई मुलाकात भी अहम साबित हुई।

नीतीश कुमार के करीबी कैबिनेट मंत्री ने एनबीटी को बताया कि बिहार एनडीए में सीट शेयरिंग सिर्फ दो पार्टियों जेडीयू और बीजेपी के बीच होगी। आपसी सहमति से ये तय हुआ है कि जेडीयू के खाते में आधी से ज्यादा सीटें आएंगी। मतलब विधानसभा की 243 सीटों में 121 से ज्यादा सीटें नीतीश कुमार की पार्टी के खाते में जाएगी। सूत्रों ने बताया कि ये संख्या 121 से 125 के बीच हो सकती है।

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कैबिनेट मंत्री ने कहा, ‘पिछले साल लोकसभा चुनाव से पहले भी सीट शेयरिंग पर तरह-तरह की बातें हो रही थी। कुछ लोग तो जेडीयू को 8 सीटें दे रहे थे। अंत में 50-50 फॉर्मुला बना। विधानसभा चुनाव में तो हालात और अलग हैं। यहां नीतीश के चेहरे पर चुनाव लड़ने की बात खुद पीएम मोदी कह चुके हैं। जब नीतीश की अगुआई में एनडीए चुनाव लड़ेगा तो सीट शेयरिंग में भी उसकी छाया दिखेगी। इसलिए सीट शेयरिंग पर सैद्धांतिक समझौता खींचतान नहीं बल्कि परस्पर सम्मान के आधार पर हुआ है।’

चिराग पासवान के बागी तेवर
जीतनराम मांझी की पार्टी को जेडीयू अपने खाते से सीटें देगी। उसी तरह रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा को सीटों का बंटवारा बीजेपी अपने खाते से केरगी। माना जा रहा है कि जीतनराम मांझी को 5 से 7 विधानसभा सीटें ऑफर की जाएगी। असली माथापच्ची बीजेपी और लोजपा के बीच होगी। चिराग पासवान लगातार नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।

पटना में जेपी नड्डा ने जब कहा कि लोजपा पूरा तरह एनडीए के साथ है, उसके बाद चिराग के तेवर ठंडे पड़ गए थे। हालांकि बुधवार को पार्टी की बैठक में एक बार फिर 143 सीटों पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया। ऐसे में बीजेपी के साथ सीट शेयरिंग मुश्किल हो सकती है। बीजेपी के एक प्रदेश प्रवक्ता ने  बताया कि मौजूदा फॉर्मूले के मुताबिक लोजपा को अधिक से अधिक 25 सीटें मिल सकती है।

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पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में जब नीतीश ने नरेंद्र मोदी की मुखालफत कर लालू यादव  का हाथ थामा था तब बीजेपी ने लोजपा को 40 सीटें दी थी लेकिन पार्टी सिर्फ एक सीट पर जीत हासिल कर सकी। 2015 से 2017 को छोड़ दें तो जेडीयू और बीजेपी का साथ 1996 से चलता आ रहा है। इस लिहाज से 2010 में हुए विधानसभा चुनाव के आधार पर ही 2020 का गणित तय होता दिखाई दे रहा है। तब बीजेपी 102 सीटों पर लड़ी और 91 पर जीत हासिल हुई. उसी तरह जेडीयू 141 सीटों पर लड़ी और 115 पर जीत हासिल हुई।

इस लिहाज से भी अगर 2020 विधानसभा चुनाव  में बीजेपी को 115 से 120 सीटें मिलती है तो किसी साझीदार पार्टी के लिए ज्यादा सीटें नहीं छोड़ सकती।
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