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मत हो गुमराह जानिए क्या है बिहार सशस्त्र पुलिस बल विधेयक 2021 का प्रावधान

मंगलवार को जिस प्रकार बिहार सशस्त्र पुलिस बल विधेयक 2021 पर बवाल मचा ,जिससे बिहार के सदन पर एक काला धब्बा लगा जहां विपक्ष अपनी सारी हदें तोड़कर बिना विधेयक को जाने लोगों को भड़काने का काम किया ,हम उस विधेयक के बारे में आपको परिचित कराते हैं, जिस विधेयक का हवा विपक्ष बनाकर बिहार के 12 करोड़ जनता को गुमराह करने पर लगा हुआ है,CISF Constable, SI and ASI Recruitment 2021: सीआईएसएफ में 2000 कांस्टेबल व  एसआई के पदों पर भर्तियां – newsplus उस विधेयक के बारे में जानना जरूरी है कि आखिर बिहार पुलिस को किन अधिकारों को दिया गया है और बिहार सशस्त्र पुलिस बल विधेयक 2021 में किन बातों का जिक्र किया गया है, दरअसल, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक 2021 बिहार सैन्य पुलिस को नई पहचान और अधिकार देने के लिए लाया गया है और राजद इसे राज्य की सामान्य पुलिस के अधिकारों में वृद्धि के तौर पर प्रचारित कर विरोध जता रहा। राजद नेता तेजस्वी का आरोप है कि बिना वारंट पुलिस कहीं भी चली जाएगी। पहले ही पुलिस लोगों को परेशान करती है, अब अधिकार बढ़े, तो आम लोगों को पुलिस और डराएगी। Bihar Vidhan Sabha : बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस बिल को विपक्ष बता रहा काला  कानून, सदन में फाड़ी गई प्रतियां - Tezlivenewsभयादोहन करेगी। जबकि राज्य सरकार का तर्क है कि यह सिर्फ सशस्त्र पुलिस बल  से जुड़ा विषय है और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की तर्ज पर बिहार सशस्त्र पुलिस बल को अधिकार मिल रहे हैं।क्या हैं इस विधेयक में प्रविधान :

– यह बिहार सैन्य पुलिस को अधिक अधिकारों से लैस करेगा।

– विधेयक में एक शीर्षक है-बिना वारंट तलाशी लेने की शक्ति।

– इसमें विशेष सशस्त्र पुलिस बल के सक्षम अधिकारी को किसी घटना के बाद आशंका के आधार पर संदेहास्पद व्यक्ति की तलाशी और गिरफ्तारी कर सकता है।

– ऐसा करने के बाद वह गिरफ्तार व्यक्ति को अगली कानूनी कार्रवाई के लिए निकट के थाना को सौंप देगा।

– प्रतिष्ठान की सुरक्षा में तैनात अधिकारी को बिना वारंट और बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के किसी संदिग्ध को गिरफ्तार करने का अधिकार मिल जाएगा।बजट सत्र: बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक के विरोध में विपक्ष का हंगामा,  विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह तक स्थगित | सांध्य प्रवक्ता खबर

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क्यों लाया गया

– यह विधेयक बिहार सैन्य पुलिस (बीएमपी) को स्वतंत्र अस्तित्व देने के लिए है।

– विधेयक पारित होने के बाद सैन्य पुलिस का नाम बदल कर विशेष सशस्त्र पुलिस हो गया है।

– किसी अन्य राज्य की पुलिस के साथ मिलिट्री नहीं जुड़ा हुआ है।

–  अत: नाम में एकरूपता के लिए भी यह विधेयक लाया जा रहा है।CSBC बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा में इंटरमीडिएट लेवल का होगा सिलेबस, यहां  देखें डिटेल्स – newsplus

क्यों चाहिए अधिक शक्ति

– विधेयक में बताया गया है कि राज्य में सशस्त्र पुलिस बल का दायरा बड़ा हो रहा है।

– पहले इसकी भूमिका कानून-व्यवस्था की स्थिति पर नियंत्रण के लिए बिहार पुलिस की मददगार की थी।

– बदले हालत में उसकी भूमिका बढ़ी है। अब इसे औद्योगिक इकाइयां, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान, हवाई अड्डा, मेट्रो, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के केंद्रों की सुरक्षा की जिम्मेवारी भी दी गई है।

इसलिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की तरह बिहार सशस्त्र पुलिस को भी गिरफ्तारी और तलाशी की शक्ति देने की आवश्यकता है।

– यह विधेयक इस बल को स्वतंत्र पहचान, नियम और अधिकार देगा।

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